
क्या रक्खा है चिक चिक में भला
जब आधा सा जीवन ही बीत चला
रोटी कपडा मकान और ब्लॉग मिला
बंद कर ये रोना धोना शिकवा गिला
पीकर लोटा भर छाछ आर्मचेयर हिला
कोई नोवल पढ़, कछुआ जला
कमबख्त सुडोकू में माथा मत पिला
आराम दे दिमाग को, उसे सुला
मोबाइल ऑफ़ कर , सब कुछ भुला
दुनियादारी ने हमेशा तुझे छला
मस्त सोजा, जाए भाड़ में सब बला


1 comments:
बहुत सही, सो जाओ.
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