Sunday, November 16, 2008

कान्हेरी गुफाएं और बोरीवली नेशनल पार्क

हमारा यात्रा दल - अशफाक सपरिवार, अवि-परी , देखें किस तरह पैर में काँटा लगने के बाद भी मुस्कुरा रहा है अशफाक
पूरा कान्हेरी केम्पस बेहतरीन ट्रेकिंग स्पॉट है। अविनाश- व्यवहार से मेरा ये मित्र किसी बुद्धिस्ट मोंक से कम नही।
मुंबई की भाग दोड़ से एक दिन चुरा कर आप पंहुच सकते हैं दो हज़ार साल पूर्व की एक दुनिया में
कान्हेरी की इन गुफाओं को १ इसा पूर्व में किस प्रयोजन से बनाया गया? क्यों इतने परिश्रम से पहाडों को सिर्फ़ काट काट कर अद्भुत प्रतिमाएं और शिलास्त्म्भ बनाए गए ?

इन बौद्ध गुफाओं में गूंजती है आदिकाल की आवाजें - और आप सोचने लगते हैं- क्या रहस्य है ? कौन रहता था यहाँ ? क्या करता था ?

आजकल यहाँ 'वेळी क्रोसिंग ' और ' रेप्लिंग ' करने वाले शौकीन आते हैं



इस पेड़ के रंग विन्यास ने मुझे मोह लिया .
ये बौद्ध प्रतिमा एक 'स्टांप' है उस युग का जिसमे अशोक का साम्राज्य हुआ करता था
ट्री हाउस पर तान्या - लगता नहीं हम मुंबई में ही हैं

यहाँ आप एक ट्रेन की सवारी का आनंद ले सकते है।

और बोटिंग करते वक्त तान्या को फोटो खिंचवाना पसंद नही

कितना मनोरम स्थल है - वृख्शाछादित मार्ग कितना 'कूल' है।
इस तालाब में कोई मगरमच्छ नही- देख लो
बहुल स्लाइड कर ली अब थोड़ा पानी पी लिया जाए।
ट्री हाउस से उतरना तो उतना आसान नही जितना ऊपर जाना था
सुरेश यश को नीचे उतारते हुए। वैसे यश को मदद की जरूरत नही लगती।
सुरेश और में बोट में। पैदल बोट से कही अधिक मुश्किल है चप्पू बोट ।
टाइगर सफारी में दिखे ये बिल्ली के मौसा आराम फरमाते हुए।

2 comments:

PN Subramanian said...

आपने कन्हेरी का भ्रमण करा दिया. इसके इतिहास पर थोड़ी और जानकारी दे सकते थे. अच्छा लगा. आभार.

सतीश पंचम said...

Nice trip. अच्छा लगा। मैं भी पैदल मेन गेट से उपर कान्हेरी केव्स तक जा आया हूँ....यादें ताज कर दीं।