Friday, January 9, 2009

माथेरान- न स्कूटर न कार न सायकल , बस घोड़े ही घोड़े

मुंबई से 108 किलोमीटर दूर लाल मिटटी का स्वर्ग- माथेरान. 800 मीटर ऊँचाई वाले इस अपार शांतिपूर्ण वृख्शाछादित सुरम्य हिल स्टेशन को देखने के लिए चलिए नेरल , जहाँ से आपको मिलती है ये नेरो गेज़ ट्रेन :-

क्यों गरम चाय का आनंद लिया जाए चलने से पहले ।


देखें कितनी प्यारी लगती है ये छुक छुक इन वादियों में।




video



ट्रेन से दिखता खूबसूरत मंज़र । ये ट्रेन शुरू हुई 1907में । २१ किलोमीटर का सफर ये ट्रेन २ घंटे में ।
ये है 'जुम्मापत्ती स्टेशन' यहाँ जलपान के बाद एक 'घुड़नाल' घुमाव से ट्रेन आपको ले जायेगी 'वाटर्पैप ' स्टेशन. यहाँ से जो मंज़र आपको वेस्टर्न घाट का दिखता है , वो एक ट्रेन से शायद आपको कही और न दिखे .



ये लो पंहुच गए हम माथेरान. अब लो एक एंट्री टिकेट और सुनो घोडों की टापें.

ट्रेन से लिया वादियों का विहंगम दृश्य.




लीजिये घुड़सवारी का मज़ा, ये यहाँ का 'मस्ट डू ' आइटम है.
video

माथेरान की खोज १८५० में मिस्टर मलेट नामक एक अँगरेज़ ने की जो उस वक्त थाने के कलेक्टर होते थे सनसेट पॉइंट से निहारिये पहाडों में डूबता सूरज
इस बन्दर को बठने के लिए इससे खतरनाक जगह नहीं मिलेगी

लाल मिटटी, हरे भरे वन और चहचहाते परिंदे. रंगों और आवाज़ का जादू है माथेरान
मनोरम चारलोट लेक- यहाँ से माथेरान को पानी मिलता है. घाटी का ये जलस्रोत अत्यन्त शीतल लगता है.

माथेरान से दस्तूरी का तीन किलोमीटर का नेचर वाक् आपकी सुबह को ऊर्जा से भर देता है.

वापसी में हम आए सड़क से. और देखो तो रेलवे ट्रेक और सड़क का ये मिलन - बिना किसी क्रोसिंग फाटक के. सड़क और ट्रेक में इतनी दोस्ती कहीं और नही मिलेगी.
थोड़ा एडवेंचर कर लें हम भी. यहाँ से अगर हम फिसले तो ....

बच्चों को हाथ रिक्शा में आनंद आया.
एको पॉइंट - एको तो इतना सुनाई नहीं देता, पर जगह अच्छी है.
लॉर्ड्स पॉइंट. विशाल पहाडियां आपको बाँध लेती हैं.

0 comments: