तेरे साथ का सावन एक नहीं अंखियों से सावन गिरे हज़ार
कुछ है जो मुझको पता नहीं , जो पता है वो करे दिल को तार
तू याद करे क्या छोड़ा तूने, मुझे मत कर ऐसा जां तू ऐसा प्यार
जब एक हुए हैं हम दोनों , क्यों छुपा रखा है तूने कुछ भी यार ?
मैंने माना कि बिन आग उठा था, धुएँ का इतना गुबार
पर रोकना तेरे बस में न था, ये बात है मेरी समझ के पार
करीब कोई कितना आएगा, कहाँ खींचनी है दीवार
ये सोचना तूने चाहा नही या भूल हुई तुझसे हर बार
तुझे पाया मैंने जबसे मैंने मान लिया तुझको संसार
पर उतर ना पाया तेरे गले से अतीत के कुछ रिश्तों का हार
मत कर समझौते मेरे लिए , छोड़ ना कोई हमदम हमराज
वो अपने दर्द के साथ मरेगा, जो सता रहा है तुझको आज


3 comments:
नहीं गिरे सावन अंखियों से प्यार की हो ऐसी बौछार।
आग भले भीतर में कुछ हो धुँए का न दिखे गुबार।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
ar ..iss kavita hai..Starting acchi thi.
Mid mai to Romance ke Charam pe tha
End mai ye tune kaya kiya ..
" Vo aapne dard ke sath marega , Jo Sata raha hai tujhko aaj "
Abe bad-duya se Khatam ki hai kavita ..." Romance" kahan chala gaya ..
it shud be something like that...
Mat kar Samjhota Mere Liye , Chod na koi Ham dam Ham Raj ,
Vo kante hi bhi Fool ban jayegge , Jo sata rahe hai tujhe aaj ..
vaaah Vaah ...
Post a Comment