Saturday, June 27, 2009

मुंबई भीगा पहली बारिश में


मुंबई की बरसात कुछ ख़ास है...और ये पहली बरसात तो कुछ और कशिश लिए आयी. केमरे में कैद कुछ पल.

"ये जो बूंदों में बरसता है
तेरा अक्स ही लगता है
जो घटाओं में कहीं बसता है
वो सावन भी समझता है
हर बादल में तू दिखता है
साथ बूंदों के पंहुचता है
तेरा एहसास मुझे छूता है
और रूह भिगो जाता है."

4 comments:

anitakumar said...

मुंबई की पहली बरसात ने आप का मन छुआ है तो जरूर आप बंबई से होगें। बंबई की बारिश में है ही ऐसी कशिश कि सब सड़कों पर खिचे चले आते है।

anitakumar said...

"स्वागत है मेरे दरबार में आपका. पवन ऊर्जा, बेबाक बयानी और सिर्फ़ दिल की सुनना - इनमे से कुछ भी आपको पसन्द है तो हम दोस्त हैं."


आप दरबार लगाते हैं? पवन ऊर्जा के बदले अगर सौर ऊर्जा में रुचि हो तो नहीं चलेगा क्या बाकी दोनों गुण(बेबाक बयानी और सिर्फ़ दिल की सुनना )भरपूर हैं…॥:)

MANVINDER BHIMBER said...

ये जो बूंदों में बरसता है
तेरा अक्स ही लगता है
जो घटाओं में कहीं बसता है
वो सावन भी समझता है
हर बादल में तू दिखता है
साथ बूंदों के पंहुचता है
तेरा एहसास मुझे छूता है
और रूह भिगो जाता है

....दिल को छु गई हैं ये पंक्तियाँ

Mrs. Asha Joglekar said...

भिगो गई आपकी ये बारिश ।