Thursday, September 10, 2009

ऐसा होता है क्यूं



ऐसा होता है क्यूं
ज़माने की ठोकर के बाद, बहुत याद आती है माँ.
ऐसा होता है क्यूं
जिस पे हो खुद से ज्यादा भरोसा, वही देता है धोखा.
ऐसा होता है क्यूं
मंदिर की सीडियां चढ़ते चढ़ते टूट जाती है आस्था.
ऐसा होता है क्यूं
लगता है बच्चों के सिवा, नही कोई जीने की वज़ह.
ऐसा होता है क्यूं
बने रहने लायक तो नही, फिर भी मिटती नही ये दुनिया.

5 comments:

वाणी गीत said...

हम भी नहीं जान पाए ...आखिर ऐसा होता है क्यों ..!!

Mithilesh dubey said...

न पता अक्सर ऐसा क्यों होता है।

अनिल कान्त : said...

man ke bhavon ko achchhi tarah likha hai aapne

Nirmla Kapila said...

ऐसा होता है क्यूं
बने रहने लायक तो नही, फिर भी मिटती नही ये दुनिया.
दिल को छूने वलि अभिव्यक्ति के लिये आभार्

sarika said...

shayad sab aisa nahi hota ,life is more beautiful i think.............