
ऐसा होता है क्यूं
ज़माने की ठोकर के बाद, बहुत याद आती है माँ.
ऐसा होता है क्यूं
जिस पे हो खुद से ज्यादा भरोसा, वही देता है धोखा.
ऐसा होता है क्यूं
मंदिर की सीडियां चढ़ते चढ़ते टूट जाती है आस्था.
ऐसा होता है क्यूं
लगता है बच्चों के सिवा, नही कोई जीने की वज़ह.
ऐसा होता है क्यूं
बने रहने लायक तो नही, फिर भी मिटती नही ये दुनिया.


5 comments:
हम भी नहीं जान पाए ...आखिर ऐसा होता है क्यों ..!!
न पता अक्सर ऐसा क्यों होता है।
man ke bhavon ko achchhi tarah likha hai aapne
ऐसा होता है क्यूं
बने रहने लायक तो नही, फिर भी मिटती नही ये दुनिया.
दिल को छूने वलि अभिव्यक्ति के लिये आभार्
shayad sab aisa nahi hota ,life is more beautiful i think.............
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