गोवा- अरब सागर के बेहतरीन बीच देखे हमने काइनेटिक होंडा पर. कमरे की खिड़की का पर्दा उठाते ही जब ये दिखा तो मुंह से निकल पडा -वाह !
ये है दक्षिण गोवा का कोल्वा बीच. इसे गोवा का 'सिल्वर' बीच कहा जाता है क्यूकी यंहा रेत चांदी तरह सफ़ेद है.
यंहा से उत्तर में हम अपनी बाइक पर पंहुचे पणजी जंहा से हमने मून-लाईट क्रूज़ सांता मोनिका का आनंद लिया. गोवा टूरिस्म के इस शिप पर कल्चरल प्रोग्राम और डिनर का आनंद लिया हमने इस मून-लाईट क्रूज़ में .
अगले दिन देखे पुराने गोवा के चर्च-
सेंट केथेड्रल .
और बोम जीसस . सन 1505 में आदिल शाह अपनी राजधानी बीजापुर से पुराने गोवा में शिफ्ट कर रहा था, लेकिन उस पर भारी पडा पुर्तगाली अल्बेकुर्क और उसने स्थापित किया पुर्तगाली शासन, जो 450 साल तक चला.
पुराने गोवा में ही हैं ये दो चर्च. बोम जीसस में संत फ्रांसिस का शरीर चांदी के पात्र में रखा गया है .
यंहा से 30 किलोमीटर और उत्तर में है गोवा का 'गोल्डन' बीच- कलान्ग्यूट .यंहा की रेत सोने की तरह पीली है.
फिर हम पंहुचे बागा बीच.बीच पर पलंग बिछाए, लोशन मलते और आराम फरमाते लोग यंहा बहुत दिखे. क्या फुर्सत का आलम था .
और उत्तर में जाने पर मिला कम भीड़-भाड़ वाला परन्तु सुन्दर बीच- अंजना. नवम्बर में यंहा रात्रिकालीन मार्केट लगता है.
और उसके बाद वगाटर बीच. बागा और वगाटर पर लगता है विदेशी सैलानी अधिक हैं.
लौटते हुए उत्तर गोवा से पणजी के रास्ते में दिखा मांडवी पे बना ये ब्रिज.
अगले दिन सुदूर दक्षिण में मिला ये बीच जंहा पानी पांच फीट गहरायी तक कांच की तरह साफ़ था. इसे कहते हैं - पालोलिम बीच.नहाने के लिए मुझे सबसा अच्छा बीच मुझे यही लगा. यंहा का रास्ता बहुत मजेदार था.
एक फेर्री में सवार होकर मय-स्कूटर आप चढ़ जाइए -केवेलोसिम में और उस पार असोलना में उतरने से पहले देखें ये खूबसूरत मंज़र
असोलना से पलोलिम के बीच कुन्लुन से आगे हाइवे पर टी-ब्रेक यंहा लिया.
लौटते वक्त हमने अलग रास्ता पकडा- वाया बेतुल. इसने तो हिल स्टेशन की याद दिला दी. हेयरपिन जैसे बेन्ड , घाट और हरियाली.
सुनसान रास्ते के कारण कुछ डर भी लगा.परन्तु गाते गाते रास्ता ऐसा कटा की पता ही नही चला हम 20 किलोमीटर बिना ब्रेक राइड कर लिए.
बेतुल से वापस कोल्वा आते हुए देखा एक रोकी बीच- अगोंडा. यंहा की गुस्सेल लहरों के कारण यंहा नहा तो नही सकते पर यंहा की वीरानी में अजीब आकर्षण है.
अगोंडा पंहुचते हुए नारियल पेडों से ढकी धरती
गोवा की एक ख़ास बात- यंहा आपको शायद दुनिया के सबसे रंगीन घर मिलेंगे. फ्लोरोसेंट ग्रीन, येल्लो, चटक पिंक, लाल, नारंगी और ये देखिये- पर्पल
और एक ख़ास बात- यंहा के लाल पत्थर - जिनको चूर कर बीच रिजोर्ट में लाल मिट्टी की चादर बिछायी जाती है.
पर सबसे ख़ास बात तो देखें- हमारा स्कूटर- हमारी गोवा दर्शन की सवारी.
और कोल्वा लौटते हुए ढल गयी सुहानी शाम .
अगले दिन हम गए कोल्वा के थोडा दक्षिण में बेनौलिम बीच.
बेनौलिम में बच्चों ने बनाया सेंड-टर्टल .
उसके और आगे है ये मनोरम वरका बीच.
और आगे जाने पर मिला कोलावास्सी बीच.
बच्चों के साथ मस्ती .
गोवा का सबसे यम्मी समोसा और चाय मिली यँहा.
अंतिम झलकी कोल्वा बीच पर.
जब तक हम वापस मुंबई पंहुचे प्रखर दो साल का हो गया.इस प्रकार साडे-तीन दिवसीय यात्रा समाप्त हुई जिसमे मुंबई - गोवा की 800 किलोमीटर ट्रेन यात्रा और गोवा में 300 किलोमीटर स्कूटर राइड हुई. इसमें हमने उत्तर गोवा के चार और दक्षिण गोवा के छः बीच देखे. अब अगली यात्र में देखेंगे-उत्तर गोवा के शेष चार बीच- डोना पोला, मीरामार और अरम्बोल, छपोरा, अगुआदा , मोर्जिम ( ये एक टर्टल नेस्टिंग बीच है ), तिराकोल और केप-राम के किले,मुन्गेश्वर मंदिर, और दक्षिण गोवा का एक और "टर्टल नेस्टिंग" बीच. देखें कब जाना होता है.


7 comments:
आप अब कहां हो
मैं गोवा आ रहा हूं
15 नवम्बर 2009 को।
अगर वहीं हो तो
जरूर मिलना।
बहुत अच्घा लगा आपका सफ़र. लेकिन जब आप ट्रेन से खींचे फोटो बता रहे हैं तो समझ में नहीं आया की आपने मुंबई से गोवा का सफ़र अपने दो चक्के वाले वाहन में किया या रेलगाडी से.
@ पी एन सुब्रहमण्यम
अचरज न करें
गुप्ता जी ने ट्रेन में
अपने स्कूटर पर बैठ
खींचे होंगे चित्र
अब तो नहीं लग
रहा होगा विचित्र।
तो बेतुल यहाँ भी है ? एक बैतूल मध्यप्रदेश मे है जहाँ मै पैदा हुआ था । चित्र देख कर मज़ा आ गया और याद आई मित्र नरेश चन्द्रकर की कवित्तायें जो उन्होने इन बीचों और गोवा पर लिखी है । उनके गोवा पर लिखे एक पत्र को मै जब प्रकाशित करूंगा तब मुझे इन चित्रो की ज़रूरत होगी अगर आप अनुमति दे तो ।
बहुत सुंदर चित्रमय यात्रा । हम भी साल पहले गोवा घूम कर आये पर २-३ बीचेज ही देखें आपनेतो सारेही देख लिये ।
गोवा की यादें ताजी हो गयीं।
very beautiful scenes........... serene nature........cute kids.. aap to bahut badiya express karte ho bhai!!!!!!!!!!! kavita bhi umda likhte ho
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