Sunday, January 24, 2010

मैसूर यात्रा - महलों में गुनगुनाते शहर की सैर

रजवाड़ों की शानो-शौकत और चन्दन की खुशबू वाले इस शहर की यात्रा आरम्भ हुई रंगनाथ्स्वामी मंदिर से
फिर हमने देखा 1764 में बना दरिया दौलत बाग़ . ये टीपू सुल्तान का ग्रीष्मकालीन महल था जो टीक वुड से बना है.
दरिया दौलत में टीपू की बहादुरी की गाथा दर्शाते चित्रों को देखने के बाद हमने देखी विशाल गुम्बज़
और ट्रेफिक से मुक्त होते ही हम पंहुचे ब्रन्दावन गार्डन. कृष्णराज सागर बाँध के नीचे बना मुग़ल स्टाइल का ये बाग़ सैलानियों से खचाखच भरा था.
यंहा का खूबसूरत म्यूजिकल फाउन्टेन देखकर दिल बाग़ बाग़ हो गया. अगले दिन इस ऐ. सी. बस में बैठ कर पंहुचे चामुंडी पहाडी.
कर्नाटक सरकार ने इन बसों को लगा कर शहर यात्रा अत्यंत आरामदेह बना दी है. चामुंडी हिल रास्ता बहुत सुन्दर था , काश हम बाइक पर होते. चामुन्देश्वरी मंदिर में जबरदस्त भीड़ के कारण दर्शन तो नही हो पाए पर जगह बहुत रमणीक है.
और फिर देखा भारात का सबसे बेहतर चिड़ियाघर. जिराफ और चिम्पंजी जैसे दुर्लभ जानवर यंहा अच्छे से रखे गए हैं.
इन बंदरों को इतने सुकून से बैठे देख आनंद आया.
मैसूर पेलेस जाते हुए रास्ते में दिखा ये एम्यूजमेंट सेंटर, जिसे हम अगली बार जरूर देखेंगे
फिर देखा 1912 में बना वोदेयार राजाओं का ये भव्य महल. इसे देश की भव्यतम इमारतों में शुमार किया जा सकता है.
इस महल के रंग विन्यास और दरबार हौल की शानो-शौकत से विस्मित हम आगे देखने गए इस लकड़ी कार्यशाला को
इसकी ख़ास बात है की रंगों का प्रयोग किसी कलाकृति में नही किया है. सभी रंक अलग अलग रंगों की लकड़ियों को चिपका कर उकेरे गए है.
और ये है हमारा राजू औटोवाला. इसने अगली बार हमें बाइक दिलाने का वादा किया.

1 comments:

Vivek Rastogi said...

वाह बहुत बढ़िया चित्रमयी यात्रा वृत्तांत।