करन जोहर की इस फिल्म में यूं तो कई विवाद हुए लेकिन फिल्म में मुझे जो 'बिटवीन द लाइंस' दिखाई दिया वो ये की 'रिलीजन' के कारण दुनिया में फैली अशांति को ख़त्म करना संभव नही है. 'रिलीजन' होंगे तो 'बाउंड्रीस ' होंगी और बाउंड्रीस होंगी तो झगडे फसाद होंगे ही. क्या इलाज़ है?कुछ समय पहले अभिनेता कमल हासन का एक विचार पढ़ा- "गोड इज जस्ट अ विटनेस". बात दिल को छू गयी. सटीक विवेचन है. मैं 'रिलीजन' को ख़त्म करने की कवायद नही करता परन्तु यदि बेगुनाहों की जान बचानी है तो कम से कम पांच साल के लिए सभी 'रिलीजन्स ' को 'सस्पेंडेड एनीमेशन' की अवस्था में रख दिया जाए. सभी धार्मिक प्रतिष्ठानों पर पांच साल के लिए बड़ा सा ताला जड़ दिया जाए . देखें कि इस नास्तिक पंचवर्षीय दुनिया में हम कितनी कडवाहट कम कर सकते है.


2 comments:
'रिलीजन्स ' को 'सस्पेंडेड एनीमेशन' की अवस्था में रख दिया जाए.
जोरदार , सहमत !
आपसे बिल्कुल सहमत .. एकांतिक स्थलों पर मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे और चर्चा बनवाकर मन की शांति के लिए जाने वाले स्थान अशांति का कारण बन जाएं .. तो भला उसके होने का क्या तुक ?
पूजा तो अपने अपने घर में भी की जा सकती है .. जिसे जिसकी पूजा करनी हो !!
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