आजकल सभी मित्र व्यस्त चल रहे हैं. कारण? "मार्च एंडिंग" है भाई. तभी एक आयडिया आया- काश साल के सभी महीने मार्च होते तो आज हम अमेरिका से भी आगे होते. कितनी तेज़ तरक्की होती है मार्च में. जितने नसबंदी ओपरेशन मार्च में होते हैं, पूरे साल मिलकर भी उतने नही होते. जितना वृक्षारोपण मार्च में होता है वो एक चमत्कार ही है. आंकड़े उठा कर देख लें- सबसे ज्यादा बिक्री, सबसे ज्यादा बिल क्लीयरिंग, सबसे ज्यादा वसूली और सबसे ज्यादा लदान मार्च में ही होता है.
पूरा उद्योग जगत पूरी शक्ति के साथ मार्च में वो कर दिखता है जो पूरे साल सोचा भी नही जा सकता . अब इसे इस तरह न कहिये कि सबसे ज्यादा हेरा-फेरी मार्च में ही होती है. दर-असल 'टार्गेट एचीव' करने का महीना है मार्च. वैसे केलेंडर बनाने वाले ने फरवरी से पूरे तीन दिन ज्यादा दिए मार्च को, परन्तु मार्च का बाहुबल देखिये की दीवार फांद कर आधे अप्रेल तक घुस आता है. 'मार्च क्लोजिंग' चलती रहती है पूरे अप्रेल. बेचारा कुंठित अप्रेल जो 'फूल्स डे' से शुरू होता है, मार्च के अतिक्रमण का शिकार है. और अगर सिर्फ 'बुकिंग' करने से सिस्टम खुश रहता है तो क्यों न चंद नंबरों से कागज़ का पेट भर दिया जाए. तो बस कहीं से भी ढूँढ लाइए कुछ बिल और लगा दीजिये क्लीयरिंग में- ये मार्च का जादुई महीना है जनाब- शरमाइये मत.
Monday, April 5, 2010
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1 comments:
मार्च भारत में होता तो वाकई एक जादुई महिना है..:)
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