सुनने में आया की अभिजीत और सुनिधि चौहान ने आतिफ को 'बेसुरा' कहा।
मुझे संगीत की ज्यादा समझ नही है, पर जब भी आतिफ को सुना है, बहुत अच्छा लगा है। उसकी आवाज़ में जो गहराई और आकर्षण है, वो सुनने वाले को बाँध लेता है। कलाकार किसी भी देश का हो, कला की कोई सरहद नही होती। आतिफ की आवज़ आज की आवाज है। उसमें कशिश है, जोर है , दर्द है। C#m कोर्ड पर जब जब उसकी उंगलियाँ गिटार पर पड़ती हैं और वो 'आदत' गाता है तो लगता है धरती आसमान एक हो गए हैं। इतनी मोहक आवाज़ बेसुरी कैसे हो सकती है.

