अधिक होना गंतव्य और सीमाओं का
कम होना संसाधन और सुविधाओं का
क्या वंचित रह जाना ही नियति है ?
एक मात्र जीवन की अप्राप्त्य अनेकों खुशियाँ
अनेक कडवी स्मृतियों में दफ़न व्यक्तित्व
क्या चिर अवसाद ही जीवन गति है?
रिश्ते हुए कुछ पलों में एकत्र होता अवांछित अनुभव
दूर की मंजिल पर टिकी निगाहों से छिपता हुआ रास्ता
क्या कुछ जिंदगियां सिर्फ काटों पर चलने के लिए बनी हैं?

